न्यूज़ डायरी टुडे, लखनऊ।
Lucknow update । उत्तर प्रदेश को लगभग चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपना स्थाई पुलिस महानिदेशक (DGP) मिल गया है। 1991 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी राजीव कृष्ण को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस का नया स्थाई मुखिया नियुक्त किया है। इससे पहले वह कार्यवाहक DGP के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।राज्य में मई 2022 में तत्कालीन DGP मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से नियमित DGP की नियुक्ति नहीं हो सकी थी। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यवाहक DGP के रूप में जिम्मेदारी संभाली, लेकिन अब राजीव कृष्ण को स्थाई तौर पर यह महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है।
UPSC पैनल से मिली मंजूरी
DGP पद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को 19 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम भेजे थे। 26 मई को नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में तीन अधिकारियों का पैनल तैयार किया गया। इस पैनल में राजीव कृष्ण, रेणुका मिश्रा और पीयूष आनंद के नाम शामिल थे।
UPSC द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए पैनल पर विचार करने के बाद सरकार ने राजीव कृष्ण के नाम को अंतिम मंजूरी दे दी।
कौन हैं राजीव कृष्ण?
राजीव कृष्ण 1991 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं। उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। प्रशासनिक और पुलिस सेवा से जुड़े परिवार से आने वाले राजीव कृष्ण का लंबा और प्रभावशाली सेवा अनुभव रहा है।
उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हैं। राजीव कृष्ण ने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन अहम पदों पर संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
राजीव कृष्ण ने उत्तर प्रदेश पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें शामिल हैं—
- ADG आगरा जोन
- ADG कानपुर जोन
- IG बरेली रेंज
- विभिन्न जिलों और जोनों में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस जिम्मेदारियां
उनकी पहचान एक अनुभवी और फील्ड में मजबूत पकड़ रखने वाले अधिकारी के रूप में की जाती है।
चार साल बाद क्यों हुई स्थाई नियुक्ति?
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी राज्य के DGP को न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल दिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक स्थाई DGP की नियुक्ति न होने के कारण कई प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय प्रभावित हो रहे थे।
अब राजीव कृष्ण की नियुक्ति के साथ राज्य पुलिस नेतृत्व को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव और शासन के साथ बेहतर समन्वय को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।
नई जिम्मेदारियों के साथ बड़ी चुनौतियां
उत्तर प्रदेश के नए DGP के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना
- महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में सुधार
- बढ़ते साइबर अपराधों पर नियंत्रण
- कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाना
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस बल की तैयारी
- नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में अपराध नियंत्रण
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के आधुनिकीकरण और तकनीकी सुदृढ़ीकरण पर भी उनका विशेष फोकस रहेगा।
शासन ने जताया भरोसा
राज्य सरकार का यह फैसला राजीव कृष्ण की प्रशासनिक क्षमता और कार्यशैली पर भरोसे को दर्शाता है। पुलिस विभाग में उनके अनुभव और जमीनी स्तर पर काम करने की शैली को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस नई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करेगी।
उत्तर प्रदेश को चार साल बाद स्थाई DGP मिलने से पुलिस प्रशासन में स्थिरता आएगी और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों को गति मिलने की संभावना है।