October 9, 2026

हाईकोर्ट की फटकार : “बच्चों को सड़क के लिए आंदोलन करना पड़े, यह बर्दाश्त नहीं”

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बच्चों को स्कूल जाने के लिए सड़क चाहिए थी, लेकिन सड़क नहीं मिली तो उन्हें हाथों में तिरंगा लेकर आंदोलन करना पड़ा। हमीरपुर के चंदूपुर गांव के इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए यूपी सरकार और अधिकारियों से जवाब मांगा है।

News Diary Today | Uttar Pradesh news

UP High Court: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के चंदूपुर गांव में आजादी के दशकों बाद भी स्कूल तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है। इस बुनियादी सुविधा के लिए 200 से अधिक स्कूली बच्चों और 50 अभिभावकों को 5 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करना पड़ा। इस गंभीर मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लिया है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए यूपी सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा है। बता दें कि चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने कहा कि बच्चों से उनकी पढ़ाई का समय छीनकर आंदोलन के लिए मजबूर करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।माननीय अदालत ने यूपी सरकार, हमीरपुर DM, पीडब्ल्यूडी (PWD) और अन्य संबंधित विभागों को तत्काल नोटिस जारी किया है।कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि सड़क निर्माण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इसकी अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को तय की गई है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि कोर्ट की फटकार के बाद अब इस लंबित प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलेगी और बच्चों को स्कूल जाने के लिए एक सुरक्षित पक्की सड़क मिल सकेगी।

आखिर क्यों नहीं बनी सड़क?

गांव से स्कूल को जोड़ने वाली करीब 1.5 किलोमीटर (1,600 मीटर) सड़क बेहद जर्जर और कीचड़ से भरी है। इसके निर्माण के लिए ₹1.81 करोड़ का बजट प्रस्ताव लंबे समय से फाइलों में दबा और लंबित पड़ा था।स्थानीय ग्रामीणों अनुसार, ग्रामीण कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके थे, लेकिन उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले।मानसून के मौसम में यह रास्ता पूरी तरह से दलदल और टापू में तब्दील हो जाता है। बच्चे कीचड़ से सने कपड़ों में स्कूल जाने को मजबूर थे, जिससे तंग आकर उन्होंने हाथों में तिरंगा लेकर ‘तिरंगा यात्रा’ के रूप में आंदोलन का रास्ता चुना।

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