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लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए दर्दनाक कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा शुरू हो गई है। इसी क्रम में नोएडा जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाते हुए सेक्टर-104 स्थित दो कोचिंग संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई की है।
बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट, जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर और मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे की संयुक्त टीम ने सेक्टर-104 में निरीक्षण किया। जांच के दौरान ‘ओम एजुकेशन’ और ‘वासु एजुकेशन’ नामक कोचिंग सेंटरों में गंभीर सुरक्षा खामियां मिलने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार दोनों संस्थानों के पास आवश्यक फायर एनओसी उपलब्ध नहीं थी। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भवन में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था नहीं थी और अग्निशमन उपकरण भी मौजूद नहीं थे।
इसके अलावा बेसमेंट में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं तथा पूरे भवन में आवागमन के लिए केवल एक ही सीढ़ी का उपयोग हो रहा था। अधिकारियों ने इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
जिलेभर में चलाया जाएगा विशेष अभियान
जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति को पूरे गौतमबुद्ध नगर जिले में बिना मान्यता, बिना फायर एनओसी तथा आवासीय एवं औद्योगिक भवनों में संचालित कोचिंग सेंटर, प्ले-वे स्कूल और गेमिंग जोन की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि लखनऊ जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्राथमिकता है।
क्या हादसे के बाद ही जागता है सिस्टम?
हालिया कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन केवल बड़े हादसों के बाद ही सक्रिय होता है?
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में नोएडा के कई कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किए गए थे, जबकि अगस्त 2024 में भी कुछ संस्थानों को सील किया गया था। इसके बावजूद शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर संचालित होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता।
इंडस्ट्रियल और रिहायशी भवनों में चल रहे संस्थान भी जांच के दायरे में आने चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। नोएडा के कई औद्योगिक और आवासीय भूखंडों पर स्कूल, प्ले-वे सेंटर और हॉस्टल संचालित होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं।
लखनऊ अग्निकांड में भी भवन के उपयोग और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। ऐसे में नोएडा समेत अन्य शहरों में भवन उपयोग नियमों के पालन की व्यापक समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।
अभिभावकों की भी बढ़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को भी बच्चों का प्रवेश कराने से पहले संस्थान की फायर एनओसी, भवन की वैधता और सुरक्षा सुविधाओं की जांच करनी चाहिए। केवल कम फीस या आकर्षक विज्ञापनों के आधार पर किसी संस्थान का चयन करना भविष्य में जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।
स्थायी समाधान के लिए क्या जरूरी?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार केवल सीलिंग कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए नियमित फायर ऑडिट, भवन सुरक्षा निरीक्षण, सार्वजनिक डेटा पोर्टल और नियमों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता है।
यदि सुरक्षा मानकों की निगरानी लगातार नहीं की गई तो ऐसी कार्रवाई केवल अस्थायी कदम बनकर रह सकती है।
