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Supreme Court। सुप्रीम कोर्ट ने हाथ से मैला ढोने (मैनुअल स्कैवेंजिंग) के कारण लगातार हो रही मौतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान और उत्तर प्रदेश (5 राज्यों) के मुख्य सचिवों को अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने साफ किया कि ठेकेदारों पर दोष मढ़कर राज्य अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। बता दें कि डॉ. बलराम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने देश में इस अमानवीय प्रथा के जारी रहने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि अक्टूबर 2023 के ऐतिहासिक फैसले के बावजूद, साल 2024 में 54 और 2025 में 46 सफाई श्रमिकों की सीवर में मौत हुई।मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कहा कि जब हमने मैनुअल स्कैवेंजिंग पर पूरी तरह रोक लगाई है, तो ये मौतें क्यों हो रही हैं? इस लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।सभी 5 राज्यों के मुख्य सचिवों को 4 हफ्तों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा देकर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सीवर मौतों के लिए मुआवजा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया था। कोर्ट ने हाल ही में जनवरी 2026 में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि 2023 से पहले की भी कोई मौत है और मुआवजा नहीं मिला है, तो उन्हें भी बढ़ा हुआ 30 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
आपको जानने चाहिए!
याचिकाकर्ता डॉ. बलराम सिंह (देशभर से मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म करने की मांग)।सुप्रीम कोर्ट ने इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए 14 सूत्रीय कड़े निर्देश जारी किए थे।जनवरी 2025 में एक अन्य आदेश के तहत दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में इस प्रथा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी।अदालत के मुताबिक, सुरक्षा उपकरणों के बिना इंसानों को जहरीले सीवर में उतारना सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) और सम्मान का खुला उल्लंघन है।
