छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, कहा—’शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी जबरन कार्रवाई, सभी सबूत और डिजिटल डेटा रखे जाएं सुरक्षित’

NEET पेपर लीक समेत विभिन्न मांगों को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जबरन पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकती। साथ ही सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।


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नई दिल्ली न्यूज़ ( सुप्रीम कोर्ट ) | देश भर में नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य मांगों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग और लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है और कानून व्यवस्था के नाम पर छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग नहीं किया जा सकता। बता दें कि अदालत ने इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश दिया है कि आंदोलन के दौरान के सभी CCTVफुटेज,ड्रोन वीडियो,बॉडी-कॉर्न कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार का रिकॉर्ड और PCR कॉल रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच में इनका सही इस्तेमाल हो सके।प्रदर्शनकारियों के मोबाइल, वीडियो और लोकेशन आदि से जुटाए गए किसी भी डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने और उसे सार्वजनिक न करने का आदेश दिया गया है।शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कोई भी दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं करेगी।कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि जिन छात्रों या लोगों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए सभी नाबालिगों को भी तुरंत छोड़ने का आदेश दिया गया है।

राज्यों को नोटिस और मुख्य सचिवों को पेश होने का निर्देश!

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों को नोटिस जारी किया है।इसके साथ ही सभी संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई के दौरान ऑनलाइन माध्यम (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) से अदालत के समक्ष पेश होने को कहा गया है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये आरोप स्वतंत्र जांच के योग्य हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि इस जांच में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 200 से अधिक पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है, जिसके बाद कोर्ट एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (SIT) या स्वतंत्र समिति के गठन और देश भर में प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक समान गाइडलाइन बनाने पर विचार करेगा।इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की गई है।

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