नोएडा सेक्टर 38-A GIP मॉल के पास बने ‘हाईटेक क्योस्क’ आखिर कब होंगे चालू? करोड़ों के निर्माण के बाद अब रखवाली पर बह रहा टैक्स का पैसा, जनता का सवाल- जिम्मेदार कौन?

नोएडा सेक्टर-38A में GIP मॉल के पास करोड़ों रुपये की लागत से बने हाईटेक क्योस्क महीनों बाद भी बंद पड़े हैं। निर्माण पूरा होने के बावजूद संचालन शुरू नहीं हुआ, जबकि रखरखाव और सुरक्षा पर लगातार सरकारी पैसा खर्च हो रहा है। अब जनता जवाब मांग रही है कि आखिर जिम्मेदार कौन है?

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नोएडा न्यूज़ | सेक्टर 38-A स्थित ग्रेट इंडिया प्लेस (GIP) मॉल के समीप नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाए गए चमचमाते और नए नवेले बहुउद्देशीय क्योस्क (Kiosks) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। जनता की सहूलियत और शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर खड़े किए गए ये क्योस्क अब एक बड़ा यक्ष प्रश्न बन चुके हैं। स्थानीय जनता और करदाताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर महीनों बीत जाने के बाद भी इन क्योस्कों का संचालन शुरू क्यों नहीं हो सका? क्या प्राधिकरण अब तक इसके संचालन के लिए किसी कंपनी का चयन भी कर पाया है या फाइलें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं?। बता दें कि सड़क किनारे से गुजरने वाले नागरिकों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन क्योस्कों को बनाने में जनता की गाढ़ी कमाई (टैक्स का पैसा) पानी की तरह बहाया गया। पहले इनके अत्याधुनिक निर्माण पर भारी-भरकम बजट खर्च किया गया, ताकि यहां से लोगों को नागरिक सुविधाएं या खान-पान के विकल्प मिल सकें। लेकिन विडंबना देखिए, निर्माण कार्य पूरा होने के लंबे समय बाद भी ये ताले में बंद हैं।अब स्थिति यह है कि इन बंद पड़े क्योस्कों को असामाजिक तत्वों और कबाड़ियों से बचाने के लिए प्राधिकरण को अलग से सुरक्षाकर्मी तैनात करने पड़ रहे हैं। यानी पहले निर्माण में मोटी रकम लगी और अब सिर्फ इनकी रखवाली करने के लिए हर महीने सरकारी खजाने से पैसा बहाया जा रहा है। जनता पूछ रही है कि इस दोहरी आर्थिक चपत का हिसाब कौन देगा?

दुर्दशा के लिए कौन है जिम्मेदार?

यदि प्राधिकरण ने इसके संचालन के लिए किसी एजेंसी या कंपनी का चयन कर लिया है, तो फिर इस बहुउद्देशीय परियोजना को लाइव करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? और अगर अभी तक कंपनी का चयन नहीं हो पाया है, तो बिना पूरी प्लानिंग और टेंडर प्रक्रिया के आनन-फानन में निर्माण कराकर करोड़ों रुपये क्यों ब्लॉक कर दिए गए?। क्या नोएडा प्राधिकरण के संबंधित विभाग की सुस्ती के कारण टेंडर प्रक्रिया अटकी हुई है?।क्या बिना किसी ठोस कमर्शियल व्यवहार्यता (Commercial Viability) के ही इस प्रोजेक्ट को पास कर दिया गया था?।बंद रहने के कारण धूल और मौसम की मार से ये नए क्योस्क समय से पहले ही जर्जर होने की कगार पर पहुंच रहे हैं, इसका नुकसान कौन भुगतेगा?

ग्राउंड जीरो की स्थिति!

GIP मॉल के आसपास का यह इलाका बेहद व्यस्त रहता है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। अगर ये क्योस्क समय पर शुरू हो जाते, तो न सिर्फ जनता को सुविधा मिलती, बल्कि प्राधिकरण को भी राजस्व (Revenue) की प्राप्ति होती। मगर फिलहाल, ये आलीशान ढांचे सिर्फ ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहे हैं।नोएडा की जागरूक जनता अब आरटीआई (RTI) और सोशल मीडिया के माध्यम से सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। देखना यह होगा कि इस तीखे विरोध और जनता के वाजिब सवालों के बाद क्या नोएडा प्राधिकरण की नींद टूटती है या फिर फाइलों के भीतर ही यह बहुउद्देशीय योजना दम तोड़ देगी।

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