माई क्लीन सिटी: लाखों की ‘रिवर्स वेंडिंग मशीनें’ खुद बनीं कचरा, कौन है इस बदहाली का जिम्मेदार?

नोएडा को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए शुरू की गई ‘माई क्लीन सिटी’ मुहिम की रिवर्स वेंडिंग मशीनें आज खुद बदहाली का शिकार हैं। लाखों रुपये की लागत से लगी ये मशीनें कहीं बंद पड़ी हैं तो कहीं टूट-फूट और कूड़े के ढेर के बीच नजर आती हैं। सवाल है—जनता के पैसे से शुरू हुई इस योजना की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है?

News Diary Today | Noida News

Noida authority | शहर को चमकाने, साफ-सुथरा बनाने और सिंगल-यूज प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्ति दिलाने के दावों के साथ नोएडा प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई ‘माई क्लीन सिटी’ (My Clean City) मुहिम अब खुद ही अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जनता के टैक्स के लाखों रुपये से शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और चौराहों पर लगाई गई आधुनिक रिवर्स वेंडिंग मशीनें (Reverse Vending Machines) आज रख-रखाव के अभाव में खुद कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। बता दें कि नोएडा को एक मॉडल प्लास्टिक मुक्त शहर बनाने के लिए इन मशीनों को स्थापित किया गया था। योजना यह थी कि नागरिक इनमें खाली प्लास्टिक की बोतलें या कैन डालेंगे, जिसके बदले उन्हें कुछ रिवॉर्ड्स या कूपन मिलेंगे। इस अनोखे और रोचक प्रयास से लोग बेहद उत्साहित थे। लेकिन आज हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।शहर के अधिकांश हिस्सों में ये मशीनें या तो पूरी तरह बंद पड़ी हैं या असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़-फोड़ का शिकार हो चुकी हैं।विडंबना देखिए कि जो मशीनें प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए आई थीं, आज उनके आसपास ही कूड़े के ढेर नजर आते हैं।मशीनों को लगाने के बाद संबंधित एजेंसियों और प्राधिकरण ने इनकी सुध लेना जरूरी नहीं समझा।माई क्लीन सिटी’ जैसी बेहतरीन मुहिम का इस तरह दम तोड़ना यह साबित करता है कि कोई भी योजना सिर्फ मशीनें स्थापित कर देने से सफल नहीं होती। जब तक उनके संचालन और रख-रखाव की निरंतर निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाएं केवल सरकारी फाइलों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएंगी। नोएडा को वास्तव में स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए प्राधिकरण को तुरंत इन कबाड़ हो चुकी मशीनों को सुधारना होगा, वरना यह मुहिम महज एक चुनावी या कागजी स्टंट बनकर रह जाएगी।

सुलगते सवाल: जनता के पैसे की बर्बादी का जवाबदेह कौन?

इस बदहाली को देखकर अब शहर के नागरिकों के मन में कई गंभीर और तीखे प्रश्नवाचक चिन्ह खड़े हो रहे हैं जब इन मशीनों के नियमित मेंटेनेंस और रख-रखाव का कोई ठोस रोडमैप नहीं था, तो जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये पानी की तरह क्यों बहाए गए?।एक तरफ प्राधिकरण स्वच्छ सर्वेक्षण में ऊंची रैंकिंग हासिल करने के बड़े-बड़े दावे करता है, तो दूसरी तरफ ऐसी जमीनी लापरवाही इन दावों की पोल क्यों खोल रही है?।क्या इन वेंडिंग मशीनों को लगाने वाली व इनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार एजेंसियों और अधिकारियों पर कभी कोई जवाबदेही तय होगी?।

Author