Greater Noida News: ग्रैंड वेनिस मॉल प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। 1.57 करोड़ रुपये की कथित निवेश ठगी के मामले में 8 लोगों और 2 कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि निवेशकों को दुकानों का कब्जा देने के बजाय यूनिट बदलकर तीसरे पक्ष को बेच दिया गया। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है।
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Greater Noida | ग्रेटर नोएडा के ग्रैंड वेनिस मॉल प्रोजेक्ट में 1.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने 8 लोगों और 2 कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली निवासी बुजुर्ग महिला निवेशक लौलीन कौर भल्ला की शिकायत पर ग्रेटर नोएडा की बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने यह कानूनी कार्रवाई की है। पीड़ितों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के निवेश और 17 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी उन्हें मॉल में दुकानों का कब्जा नहीं दिया गया। बता दें कि पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर ग्रैंड एक्सप्रेस डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (Grand Express Developers Pvt Ltd) तथा बीबेल्डी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (Bebeldi Properties Pvt Ltd) समेत कुल आठ लोगों को इस मामले में नामजद किया गया है और शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रमोटर्स ने जालसाजी और आपराधिक साजिश रचकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद पीड़ित महिला को आवंटित की गई दुकानों का यूनिट नंबर बदलकर उन्हें किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को बेच दिया गया और दिल्ली निवासी पीड़िता लौलीन कौर भल्ला ने बताया कि उन्होंने अपने दिव्यांग बेटे जगविंदर भल्ला के सुरक्षित आर्थिक भविष्य के लिए वर्ष 2007 में इस कमर्शियल प्रोजेक्ट में भारी-भरकम पूंजी निवेश की थी। कंपनी के लोगों ने उन्हें शानदार रिटर्न और सुरक्षा का झांसा दिया था और बीटा-2 कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार के मुताबिक, महिला की तहरीर पर संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम मामले से जुड़े बैंक खातों, दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन डिटेल्स की गहनता से जांच कर रही है।
मामले की पृष्ठभूमि?
यह पहली बार नहीं है जब ग्रैंड वेनिस मॉल प्रोजेक्ट विवादों में आया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रमोटर सतिंदर सिंह भसीन (मोंटू भसीन) के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में 80 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे प्रोजेक्ट को रहने और उपयोग करने के लिए असुरक्षित व अयोग्य घोषित करते हुए प्रमोटर की जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था।