नोएडा प्राधिकरण का नया मुख्यालय: उद्घाटन के डेढ़ महीने बाद ही गिरी फॉल्स सीलिंग, करोड़ों की बिल्डिंग की गुणवत्ता पर उठे सवाल

Noida: 390 करोड़ रुपये की लागत और करीब 10 साल में तैयार हुआ नोएडा प्राधिकरण का नया मुख्यालय उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सवालों के घेरे में आ गया है। सूत्रों के अनुसार भवन के ग्राउंड फ्लोर और छठी मंजिल पर फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना सामने आई है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

News Diary Today | Noida News

नोएडा न्यूज़ | जिस इमारत से पूरे नोएडा के विकास की योजनाएं तैयार होनी हैं, उसी इमारत की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के नए प्रशासनिक मुख्यालय का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 जून 2026 को किया था। करीब 390 करोड़ रुपये की लागत और लगभग 10 वर्षों में तैयार हुई इस बहुमंजिला इमारत में अब फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को भवन के ग्राउंड फ्लोर स्थित रिसेप्शन की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा अचानक नीचे गिर गया। वहीं यह भी जानकारी मिल रही है कि छठी मंजिल, जहां एसीईओ वंदना त्रिपाठी का कार्यालय है, वहां की लॉबी की फॉल्स सीलिंग भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गई। हालांकि, इस संबंध में अभी तक प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

390 करोड़ की इमारत… फिर भी गुणवत्ता पर सवाल

इस भवन के निर्माण पर लगभग 299 करोड़ रुपये सिविल कार्यों और करीब 90 करोड़ रुपये विद्युत एवं अन्य सुविधाओं पर खर्च किए गए। निर्माण कार्य वर्ष 2016 में शुरू हुआ था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना लगभग 10 साल बाद पूरी हो सकी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस प्राधिकरण के जिम्मे पूरे शहर की आधारभूत संरचना, सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, क्या वह अपने ही मुख्यालय का निर्माण तय मानकों के अनुरूप नहीं करा पाया?

अधिकारियों में भी चर्चा

सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों के बीच भी नई बिल्डिंग की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यहां तक कि कुछ अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में यह कहते हुए बताए जा रहे हैं कि “सेक्टर-6 का पुराना कार्यालय ही बेहतर था।” हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?

यदि शुरुआती दौर में ही भवन के अंदर फॉल्स सीलिंग गिरने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, तो कई सवाल स्वतः खड़े होते हैं—

  • क्या निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन किया गया?
  • क्या निर्माण सामग्री या कार्य की निगरानी में कहीं लापरवाही हुई?
  • क्या निर्माण एजेंसी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
  • क्या किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से पूरे भवन का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?

कार्रवाई की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सार्वजनिक भवन में निर्माण संबंधी खामियां सामने आती हैं तो केवल मरम्मत कर देना पर्याप्त नहीं होता। पूरे भवन का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, निर्माण सामग्री की जांच, जिम्मेदार एजेंसी और निगरानी अधिकारियों की जवाबदेही तय करना तथा दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की निगाहें नोएडा प्राधिकरण के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। यदि यह घटना वास्तव में निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी है, तो यह केवल एक भवन का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक धन और सरकारी निर्माण कार्यों की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल भी है।

(नोट: यह खबर उपलब्ध सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। फॉल्स सीलिंग गिरने की घटना और अन्य दावों पर प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद समाचार को अपडेट किया जाएगा।)

Author

  • Harvir Chauhan

    Harvir Chauhan
    Editor-in-Chief & Founder, News Diary Today

    हरवीर चौहान एक वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और मीडिया उद्यमी हैं, जिन्हें समाचार एवं डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 10+ वर्षों का अनुभव है। वे Doordarshan Uttar Pradesh और India News जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे NewsDiaryToday.com और ‘न्यूज़ डायरी टुडे’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संस्थापक एवं Editor-in-Chief हैं। वे तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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