14 करोड़ रुपये की लागत से बनी ‘दादी चंद्रो तोमर शूटिंग रेंज’ आज जर्जर हालत में बंद पड़ी है। राष्ट्रीय शूटर शेफाली तोमर ने नोएडा प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि जब खेल सुविधाएं ही बदहाल होंगी, तो खिलाड़ी देश के लिए पदक कैसे जीतेंगे? जानिए पूरी खबर।
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नोएडा न्यूज़ | नोएडा के सेक्टर-21ए स्टेडियम में करीब 14 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज वर्तमान में बंद और जर्जर हालत में पड़ी है। साल 2021 में दुनिया को अलविदा कह चुकीं मशहूर ‘शूटर दादी’ दादी चंद्रो तोमर के नाम पर इस रेंज का नामकरण किया गया था। इस बदहाली को लेकर दादी चंद्रो तोमर की पोती और राष्ट्रीय स्तर की शूटर शेफाली तोमर ने नोएडा प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। शेफाली ने सवाल उठाया है कि अगर देश की इतनी महंगी खेल संपत्तियां इस तरह बंद रहेंगी, तो खिलाड़ी देश के लिए ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक कैसे लाएंगे?। बता दें कि इस अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड इंडोर शूटिंग रेंज को तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च हुए थे, जो अब रख-रखाव के अभाव में कबाड़ बन रही है।दादी चंद्रो तोमर की पोती शेफाली तोमर ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इसके खिलाफ आवाज़ उठाई है।रेंज के अंदर आधुनिक टारगेट और जरूरी मशीनें तक मौजूद नहीं हैं, जिससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग पूरी तरह ठप है।शेफाली तोमर इस मामले और नोएडा प्रशासन के कथित भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंचीं, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिल सका।
शूटर दादी’ के नाम पर हुआ था गौरवमयी नामकरण!
पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली चंद्रो तोमर ने अपनी उम्र के 60वें पड़ाव में बंदूक थामी थी और 30 से अधिक राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर रूढ़ियों को तोड़ा था। साल 2021 में कोरोना के कारण उनके निधन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिलाओं और युवाओं को प्रेरित करने के लिए नोएडा शूटिंग रेंज का नाम बदलकर ‘दादी चंद्रो तोमर शूटिंग रेंज’ करने का बड़ा फैसला किया था। जनवरी 2022 में इसका औपचारिक उद्घाटन भी बड़ी धूमधाम से किया गया था।
खिलाड़ियों के भविष्य पर लगा ग्रहण!
इस शूटिंग रेंज को 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की श्रेणियों के साथ डिजाइन किया गया था ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को विश्व स्तरीय अभ्यास मिल सके। लेकिन वर्तमान में यह पूरी तरह चालू न होने और मशीनों की कमी के कारण बंद पड़ी है। आने वाली राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं को देखते हुए नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के निशानेबाजों के पास अभ्यास करने के लिए सरकारी जगह नहीं बची है। खिलाड़ियों को निजी और महंगे अकादमियों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है।