यूपी में अफसरों की ‘नो-न नखरे’ वाली पेशी: कोर्ट में खुले बाल, भड़कीले कपड़े और रंगीन चश्मों पर योगी सरकार का फुल स्टॉप!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब अफसरों को कोर्ट में पेशी के दौरान अपने पहनावे और लुक को लेकर मनमानी नहीं चलेगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट की आपत्ति के बाद योगी सरकार ने कोर्ट प्रोटोकॉल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। फिजिकल हो या वर्चुअल पेशी, अधिकारियों को निर्धारित औपचारिक ड्रेस में रहना होगा।

लखनऊ न्यूज़ | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अदालत की गरिमा और प्रोटोकॉल को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए एक बेहद सख्त और नया फरमान जारी किया है। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद, शासन ने साफ कर दिया है कि कोर्ट रूम के भीतर अफसरों का ‘कैजुअल लुक’ या मनमर्जी का पहनावा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि यह आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रभारी मुख्य स्थायी वकील द्वारा मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (न्याय) को लिखे गए पत्र के बाद जारी किया गया है, जिसमें अधिकारियों द्वारा कोर्ट प्रोटोकॉल की अनदेखी की शिकायत की गई थी।सरकार द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक अब नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं।अधिकारी चाहे शारीरिक (फिजिकल) रूप से कोर्ट में हाजिर हों या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल माध्यम से, उन्हें हर हाल में निर्धारित औपचारिक ड्रेस कोड में ही रहना होगा।शपथ पत्र पर लगाई जाने वाली अधिकारी की तस्वीर नवीनतम (लेटेस्ट) और पूरी तरह शालीन कपड़ों में होनी चाहिए।कोर्ट रूम या हलफनामे की फोटो में भड़कीले कपड़े, खुले बाल, आधुनिक लुक, रंगीन चश्मे या सनग्लासेज पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।शपथ पत्र दाखिल करने वाले अधिकारी, शपथ आयुक्त (ओथ कमिश्नर) या नोटरी के हस्ताक्षर और मोहर के लिए केवल नीली स्याही (Blue Ink) का उपयोग अनिवार्य किया गया है। लाल, काली, हरी या किसी भी अन्य रंग की स्याही पर पूरी तरह रोक है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

अक्सर देखा जा रहा था कि अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश होते समय या हलफनामा देते समय निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे थे। कोर्ट की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए सरकार ने सभी मंडलायुक्तों (Commissioners), जिलाधिकारियों (DMs) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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