लखनऊ : 24 साल पुराने चर्चित इंद्र देव सिंह हत्याकांड में आखिरकार न्याय की बड़ी जीत हुई है। विशेष सीबीआई अदालत ने नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस लक्ष्मी सिंह के पिता और वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्र देव सिंह की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। अब 7 जुलाई 2026 को अदालत सजा का ऐलान करेगी।
लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 24 साल पहले हुए मशहूर इंद्र देव सिंह हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ की घड़ी आ गई है। लखनऊ की विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में तीन मुख्य आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दिया है।बता दें कि मृतक इंद्र देव सिंह लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और शहर के बेहद प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता थे। वह नोएडा की वर्तमान पुलिस कमिश्नर, वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी लक्ष्मी सिंह के पिता थे और यह वारदात साल 2002 में लखनऊ के पॉश और व्यस्त इलाके कैसरबाग में हुई थी। बदमाशों ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्र देव सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस दुस्साहसिक हत्याकांड से न सिर्फ लखनऊ का कानूनी गलियारा बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश दहल उठा था। वकीलों के भारी आक्रोश और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी और सीबीआई ने मामले की कमान संभालते हुए गहन तफ्तीश की और हत्या की कड़ियों को जोड़ते हुए तीन आरोपियों के खिलाफ अदालत में पुख्ता चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में यह कानूनी लड़ाई करीब 24 साल तक चली। इस लंबी अवधि में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और सबूतों को परखा गया।आखिरकार, विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश ने सभी गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी माना और सीबीआई की विशेष अदालत ने जिन तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है उनका नाम विक्रम यादव उर्फ कालिया,पन्ना सिंह,बृजेश यादव उर्फ मुन्ना
को न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और धारा 120बी (अंशात्मक/आपराधिक साजिश) के तहत कसूरवार पाया है।
7 जुलाई को मुकर्रर होगी सजा!
दोषी करार दिए जाने के बाद अब सबकी नजरें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं। विशेष सीबीआई अदालत ने सजा के ऐलान के लिए 7 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है। इसी दिन कोर्ट में बहस होगी और यह तय किया जाएगा कि इन तीनों दोषियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) दी जाएगी या फिर उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई जाएगी। 24 साल बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय मिलने में भले ही वक्त लगे, लेकिन अपराधी बच नहीं सकता।
परिवार को मिला न्याय का भरोसा!
इंद्र देव सिंह की बेटी और वर्तमान में गौतमबुद्धनगर की पुलिस कमिश्नर आईपीएस लक्ष्मी सिंह के लिए यह फैसला भावनात्मक रूप से बेहद अहम है। 24 साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।इस फैसले को प्रदेश की कानूनी व्यवस्था में एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दशकों पुराने हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया है।